सुभेक्षा

 

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तीर हैं न कमान हैं , बस एक ही फरमान हैं । शिक्षा सेवा बलिदान बनू , यह मेरा अरमान हैं ।

महाविद्यालय रूपी अजर - अमर होकर यूँ ही समाज को प्रकाशित करता रहे,जीवन पर्यन्त विद्यालय रूपी मन्दिर में रह कर समाज का उत्थान  करता रहा, तपोपरान्त अपनी शक्ति के अनुसार अपने जीवन के चौथे पायदान में खड़ा होकर महाविद्यालय रूपी मन्दिर का निर्माण जहां समन्वय की भावना, छात्र -छात्राओ   के प्रति सौहार्द , अपने कर्मचारियों के प्रति पुत्रवत स्नेह, समाज के प्रति सेवा भाव आदि। … को अपनी धरोहर मानकर यह महाविद्यालय रूपी मन्दिर समाज को समर्पित कर अपने आपको अहोभाग्य  समझा । 

 

प्रबन्धक / चेयरमैन

शिव प्रताप सिंह

पूर्व प्रधाना चार्य


अ० इ० का० अढौली  फतेहपुर